वृक्षासन – अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का दूसरा आसन – June 2025

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के प्रोटोकॉल का दूसरा आसन

योग आचार्य डॉ. धर्मवीर यादव
योग प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ

वृक्षासन परिचय
Tree Pose
वृक्ष का अर्थ है पेड़ (Tree)और आसन का अर्थ है शारीरिक स्थिति (Pose )। इस आसन की अंतिम अवस्था में शारीरिक स्थिति एक वृक्ष की तरह दिखाई देती है। इसीलिए इस आसन को वृक्षासन कहा जाता है।
अभ्यास विधि

  • दोनों पैरों के बीच में दो से तीन इंच का अंतर रखते हुए सीधे खड़े हो जाएं।
  • अब श्वास छोड़ते हुए धीरे-धीरे अपने दाएं पैर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसके पंजे को बाएं पैर की अंदरूनी जांघ पर इस प्रकार रखें कि एड़ी मूलाधार क्षेत्र को स्पर्श करे।
  • इसके बाद श्वास भरते हुए धीरे-धीरे अपने दोनों हाथों को सिर के ऊपर ले जाते हुए आपस में जोड़ लें जैसा चरित्र में दिखाया गया है।
  • इस स्थिति में 15 से 20 सेकंड तक रुकने का प्रयास करें और श्वास प्रश्वास सामान्य रखें।
  • श्वास छोड़ते हुए दोनों हाथों को नीचे ले आएं और दायां पर भी पूर्व अवस्था में ले आएं।
  • अब शरीर को शिथिल करें और पुनः दूसरे पैर अर्थात बाएं पैर से इस अभ्यास को दोहराएं।

किसे नहीं करना चाहिए

जिनके घुटने में दर्द, अर्थराइटिस, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, माइग्रेन, वर्टिगो एवं शरीर में अधिक कंपन है, उनको यह आसन नहीं करना चाहिए।
ध्यान रखें

  • शुरुआत में यह अभ्यास दीवार, व्यक्ति आदि का सहारा लेकर भी कर सकते हैं और दोनों हाथों को छाती के सामने प्रार्थना की स्थित में जोड़कर भी कर सकते हैं।
  • अभ्यास की पूर्ण स्थिति में दृष्टि सामने किसी निश्चित बिंदु पर टिकाएं।

लाभ

  • यह आसन बढ़ती उम्र के साथ शरीर में होने वाले कंपन को दूर करता है।
  • इस आसन से शरीर एवं मन के मध्य संतुलन स्थापित होता है।
  • इस आसन के अभ्यास से घुटनों का मिलना (Knock Knees) ठीक हो जाता है।
  • इस आसन से तांत्रिक से संबंधित स्नायुओं में अच्छा समन्वय होता है।
  • इस आसन के अभ्यास से मन एकाग्र होता है।
  • जागरूकता एवं सहनशीलता बढ़ती है।
  • पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती है।

विशेष

  • वृक्षासन का अभ्यास किसी अनुभवी योग्य योग प्रशिक्षक के निर्देश अनुसार ही करना चाहिए।

क्या आप जानते हैं
वृक्षासन एक पारंपरिक तौर पर खड़े होकर किये जाने वाला आसन है, जो शरीर में शक्ति और संतुलन स्थापित करता है। यह अभ्यास शरीर और मन को केंद्रित, स्थिर और समन्वय स्थापित करता है।

About the Author

Dr. Dharambir Yadav

डॉ. धर्मबीर यादव योग विशेषज्ञ,
इंदिरा गांधी विश्विद्यालय रेवाड़ी हरियाणा
मोबाइल न.: 9466431860 | ईमेल: dharambiryadav.yogi@gmail.com
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डॉ. धर्मवीर यादव अत्यन्त सरल व सहज व्यक्तित्व के स्वामी हैं। पिछले 15 वर्षों से इनका योग के क्षेत्र में अनुपमीय योगदान रहा है। योगमय जीवनचर्या का पालन करने वाले डॉ. धर्मवीर में योग में Post Graduate Diploma (Gold Medal), M.A., NET-JRF व Ph.D की डिग्री प्राप्त की हैं। डॉ. धर्मवीर आयुष मंत्रालय के योग प्रमाणीकरण मंडल (YCB) में परीक्षक भी हैं। डॉ. धर्मवीर योग परिवार सोसायटी के कार्यकारिणी सदस्य, अध्यात्म योग संस्थान हरियाणा के प्रेसिडेंट व इंटरनेशनल नेचुरोपैथी ऑर्गेनाइजेशन (INO) हरियाणा के संयोजक भी हैं। डॉ. धर्मवीर योगासन प्रतियोगिता में विश्व योग चैंपियन हैं तथा राष्ट्रीय योगासन प्रतियोगिताओं में मैनपावर की भूमिका भी निभाते रहे हैं। लेखन व बोल-चाल में विशेष रूचि होने का ही परिणाम है कि इनके रिसर्च पेपर और आर्टिकल राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुके हैं। FM Radio, TV Channel, Youtube के माध्यम से योग, नेचुरोपैथी, ध्यान आदि विषयों का निरंतर प्रशिक्षण देते रहते हैं। डॉ. धर्मवीर की सात पुस्तकें योगियों का जीवन परिचय, योगासार, योगवासिष्ठ सार, गीता योगामृत, शंख प्रक्षालन, योग : A Way of life, नेचुरोपैथी : A Way of life प्रकाशित हो चुकी हैं

अनेक मंचों पर योग की प्रस्तुति कर चुके डॉ. धर्मवीर विदेश गाँधी यूनिवर्सिटी, सेवाई (हरियाणा) के योग विभाग में सहायक आचार्य के पद पर कार्यरत हैं।

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