Description
गीता योगामृत
पुस्तक के बारे में गीता योगामृत कृति में लेखक ने गीता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, अध्यायों का संक्षिप्त परिचय, भगवद्गीता पर भाष्य (टीकाएं), गीता में योग, योग की परिभाषाएं, अष्टांग योग, कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग, ध्यानयोग, राजयोग, सांख्ययोग, मोक्ष संन्यास योग, स्थित प्रज्ञ के लक्षण और विशेषताएं, गीता में आहार – विहार, वर्तमान परिदृश्य में गीता की प्रासंगिकता, वर्तमान में प्रचलित प्रमुख मानसिक विकार-चिंता अवसाद, तनाव, क्रोध, भय, अकर्मण्यता से मुक्ति के उपाय आदि गूढ़ विषयों को चार अध्यायों में विमर्शित कर सरल-सहज भाषा में समझाने का यथासम्भव प्रयास किया है।
विश्वविद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों के योग संबंधी पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए Certificate, Diploma, B.A./B.Sc., M.A./M.Sc., B.Ed, CUCET, YCB, SET, NET/JRF, BNYS, Ph.D आदि परीक्षाओं के अनुरूप प्रस्तुत पुस्तक की रचना की गई है। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित योग प्रमाणीकरण मंडल (YCB की विभिन्न परीक्षाओं, योग वेलनेस इंस्ट्रक्टर, योग शिक्षक, योग मास्टर, सहायक योग चिकित्सक, योग चिकित्सक, थेरपेटिक योग कंसल्टेंट आदि में अति उपयोगी है।
योग संबंधी प्रतियोगी परीक्षाओं एवं स्वयं के आकलन हेतु गीता के अनुरूप अध्यायों के महत्त्वपूर्ण सात-सौ प्रश्न-उत्तरों को समावेश किया गया है। प्रस्तुत पुस्तक योगार्थियों के साथ-साथ आम व्यक्ति के लिए भी बहुत उपयोगी सिद्ध होगी, ऐसा लेखक का अटल विश्वास है।
लेखक के बारे में
डॉ. धर्मवीर यादव अत्यन्त सरल व सहज व्यक्तित्व के स्वामी हैं। पिछले 15 वर्षों से इनका योग के क्षेत्र में अनुपमीय योगदान रहा है। योगमय जीवनचर्या का पालन करने वाले डॉ. धर्मवीर में योग में Post Graduate Diploma (Gold Medal), M.A., NET-JRF व Ph.D की डिग्री प्राप्त की हैं। डॉ. धर्मवीर आयुष मंत्रालय के योग प्रमाणीकरण मंडल (YCB) में परीक्षक भी हैं। डॉ. धर्मवीर योग परिवार सोसायटी के कार्यकारिणी सदस्य, अध्यात्म योग संस्थान हरियाणा के प्रेसिडेंट व इंटरनेशनल नेचुरोपैथी ऑर्गेनाइजेशन (INO) हरियाणा के संयोजक भी हैं। डॉ. धर्मवीर योगासन प्रतियोगिता में विश्व योग चैंपियन हैं तथा राष्ट्रीय योगासन प्रतियोगिताओं में मैनपावर की भूमिका भी निभाते रहे हैं। लेखन व बोल-चाल में विशेष रूचि होने का ही परिणाम है कि इनके रिसर्च पेपर और आर्टिकल राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुके हैं। FM Radio, TV Channel, Youtube के माध्यम से योग, नेचुरोपैथी, ध्यान आदि विषयों का निरंतर प्रशिक्षण देते रहते हैं। डॉ. धर्मवीर की सात पुस्तकें (योगियों का जीवन परिचय, योगासार, योगवासिष्ठ सार, गीता योगामृत, शंख प्रक्षालन, योग : A Way of life, नेचुरोपैथी : A Way of life) प्रकाशित हो चुकी हैं। अनेक मंचों पर योग की प्रस्तुति कर चुके डॉ. धर्मवीर विदेश गाँधी यूनिवर्सिटी, सेवाई (हरियाणा) के योग विभाग में सहायक आचार्य के पद पर कार्यरत हैं।




